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Tuesday, July 26, 2011

आज कल मैं कमाल कर रही हूं

फ़िल्म :  त्रिशूल
किस सन में रिलीज़ हुई : 1978
किसने कहा : गीता (राखी गुल्ज़ार)
किससे कहा : विजय कुमार (अमिताभ बच्चन)
सम्वाद लेखक : सलीम जावेद

यश चोपडा साहब को आज की पीढी रूमानी फ़िल्मकार के रूप में जानती है, पर हिन्दी सिनेमा की दो बेहतरीन ऍक्शन तस्वीरें उन्हीं के नाम है - एक तो है दीवार और दूसरी है त्रिशूल.

गीता के बॉस श्री आर के गुप्ता (संजीव कुमार) को ये ग़लतफ़हमी हो जाती है कि गीता ने सम्वेदनशील जानकारी उनके प्रतियोगी विजय कुमार तक पहुंचाई, इसलिए वो गीता को बरतरफ़ कर देते हैं. असलियत में गीता बिल्कुल बेक़सूर थी. और ये ग़लतफ़हमी दूर भी ख़ुद विजय ही करता है. पर गीता को आर के गुप्ता का बरताव नागवार गुज़रता है, और वो नौकरी छोड देती है. ऐसे आलम में एक दिन गीता की मुलाक़ात पांच सितारा होटेल के कॉफ़ी शॉप में विजय से हो जाती है. विजय बातचीत कुछ इस तरह शुरु करता है

"मुझे कुछ ज़रूरी बात करनी थी. वैसे आज कल आप क्या कर रही हैं?"

गीता बडे नायाब अन्दाज़ में जवाब देती है,

"कहते हैं ना जो कुछ नहीं करते वो कमाल करते हैं"
"आज कल  मैं कमाल कर रही हूं"

विजय जवाब सुन के चौंक जाते हैं, उनकी प्रतिक्रिया देख कर गीता समझाते हुए कहती हैं



तो आइन्दा अगर कोई ऐसी सूरत पेश आए, जब आप घर पर ख़ाली बैठे हों, तो ये जुमला इस्तेमाल कर सकते हैं आप. वैसे देखा जाये तो इन दिनों मैं भी कमाल ही कर रहा हूं! :)

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